तीजा के तिहार अउ भरम के भूत – छत्तीसगढ़ी कहानी

तीजा के तिहार अउ भरम के भूत – छत्तीसगढ़ी कहानी

  • स्व. कपिलनाथ कश्यप बिलासपुर

तीजा तिहार चार दिन आंचे रहय। राधा चार भाई एकझन दुलोरिन बहिनी ससुर अपन कुरिया के डेहरी म बइठे बइठे सुररत रहय कि बोला लेय वर आज ले कोनो कइसे नई दिखिन चोकर दाई तीजा के चार दिन के पहिली भइया ल ले बर काबर नह भेजिस वोकर संगवारीमन आ गे होही जम्मों झन जुर-जुर के गोठियावत होही ठीक बोतके बेरा बरातू पहटिया भइस ल बांधे बर आइस खोला देख के राधा डेहरी ले तिरियागे अउ कपाट के ओधा ले कहिसा कस हो पहटिया अपन बेटा ला मोर मइके नइ भेज देतेस। जाके मोर दाई ल तीजा ले बर बलाये हे कह आतिस बरातू हांसत-हांसत कहिस भेज देहव दाई काल बिहनिहा अउ भइस बांध के चारा पानी देइस अउ चल देइस

राधा के सास जउन ऊपर ले राधा ल पहटिया संग गोठियावत देखे रहय वोकर देह म आगी तो बरगे बिखहर नागिन अस फुफकारत राधा के कुरिया म आके

राधा ल कहिस- तोला लाज सरम लगये वो नकटी। एक तो ते अपन नाक कटाबे त कटाबे, तें हमरो नाक ल कटवाबे छी-छी बड़का घर के बेटी, पतो होके कमिया पहटियामन सो हांसही गोठियाहीं आन दे तोर गोसइया ल। तभे तौर घर के डेहरी म गोड़ धरते वोला का होंगे। वोकरो मूड म मोहनी थोप दे तभे तो ससम के मोरो सो नई गोठियावय। कालेच बिहनिहा तोला तोर मइके नइ अमराहव तव मोर पारबती के नाव का लेबे।

बिचारी राधा सास के गोठ ल सुनके सकपकागे। आंखी ले टप- टप आंसू गिरे लागिस। आगू ह अंधियार लागिस का के का होगे भगवान! मने-मन म गुने लागिस बेरा बुड़तहा के बेरा राधा के भाई

बाबूलाल पागाबांधे रोटी- पीठा के गठरी धरे लहकत राधा ल लेवाये बर आइस राधा अपन भाई के पांव परिस अउ पूछिस ‘दाई बने हे भइया, भाईमन अउ भौजीमन बने हैं। पारबती अपन बेटा मनोहर ल घर आये जान के वोला बला के फुसुर- फुसुर गोठियाइस अउ आखिर म कहिस-निच्चट मेड़वा हो गये। डौकी के बस हो गये हस। वोकर गुन ला मैं जानथंव, तैं नई जानस बिहनिया राधा अपन भाई संग मइके आ गे।

राधा ल मइके आये आठ दिन हो गये रहय, फेर वोला अइसे लगय कि वोहा कालेच आये हे। आज राधा घर वोकर संगवारीमन के नेवता हे। आज सबेझन वोकर घर म जुरमिल के आइन। ठेठरी, खुरमी, कुसली, चीला सबेझन हांस-हांस के खाइन।

रंग-रंग के गोठिया के ठिठोली कर एक-दूसर ल उटकाइन, ताली बजाइन। ठीक वोतके बेरा राधा के दाई आके कहिस। हांस गोठियाला बेटीमन! काल राधा ल वोकर भाई वोकर ससुरार अमराये जाही।

आज ठीक राधा ल एक पाख मइके म राख के वोकर भाई वोला राधा के ससुरार म अमराइस राधा के सास बाबूलाल ल जउन अभी ठाढ़ेच रहय, गुररावत कहिस ‘का जल्दी परे रहिस, अपन बहिनी ल राखे नइ रहितेव। वोकर बिना इहां का अटके हे।’ मइके-मइके रात – दिन रटत तो रहिस, जावा ले जावा, मइके म राखे रहा हमर घर हर वोकर लाइक नइये। वोकर इहां रहे ले हमरो इज्जत बेचा जाही। किसुन का होगे दाई ! काबर

बउछाये हस? पहुना के आगू अइसन नइ कहंय तोर बर पहुना होही मोर तो…। विचारी राधा कपाट के ओधा ले ठाढ़े रोवत- रोवत कहिस- ‘तीजा के तीन दिन पहिली पहटिया ल अतके कहें कि पहटिया तैं अपन बेटा ल काल हमर मइके गांव नइ भेज देतेस, हमर दाई ल ले बर तुंहर बेटी बलाये हे कह आतिस। ऐकर ले एक आखर अठ कुछू कहे होहंब त मोर मुंह म कीरा परही। ऐला सुन के बाबूलाल तो चुपे रहिस, किसुन कहिस कस वो दाई अतके बात ल लेके तैं पहार अलगा लेहे? बाबूलाल कहिस महतारी, एक पइत के मान अबुद्धी छोकरी ल अपने समझ के माफ कर दे। महूं तोर पांव पर के बिनती करथंव। बिचारी राधा आंसू पोंछत अपन सास के गोड़ म गिर गे, फेर पारबती के छाती नइ पसीजिस।

राधा बिचारी अपन भाई के पांव परिस अउ कुरिया भीतर खुसरगे। किसुन ह बाबूलाल ल बाहिर गांव ले अमरायें आइस अउ वोकर पांव परके लहुटगे। बाबूलाल डहर भरत सोचत सोचत कहय- हे भगवान त ह माइलोगिनमन ल कावर जीभ देच जीभ नइ रहतिस त मोर बहिनी के काबर अइसन हाल होतिस। अइसन कहत कहत लहुट-लहुट के पाछू ल देखत बिचारा अपन गांव वर चल देइस।

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जन्मदिन के गाड़ा - गाड़ा बधाई हो मोर भाई सदैव आप मन के उपर महादेव के कृपा अउ आशीर्वाद बने रहाए ''CG Birthday Shayari''

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कभू कभू मन के बात ला बताए ला लगथे, कभू-कभू मया मे खिसीयाय ला लगथे, कभू तो मैसेज कर दे करव संगवारी.. एकरो बर तुमन ला जोजीयाय ला लगथे। ????????????????????

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कइसे बइठे हौ अल्लर असन,थोरकन अपन मया दिखावा।परस्तुती पसन्द आइस हो ही त, ताली तो जरूर बजावा।। ???? ???? ???? ????

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